ECHS संकट में: 12000 करोड़ रुपये बकाया, पूर्व सैनिकों का इलाज खतरे में
भारत सरकार द्वारा वर्ष 2003 में शुरू की गई Ex-Servicemen Contributory Health Scheme (ECHS) का उद्देश्य पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को कैशलेस और कैपलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना था। लेकिन आज यही योजना गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है।
हाल ही में All India Congress Committee के Ex-Servicemen Department ने इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रपति महोदया को एक विस्तृत Memorandum सौंपा है, जिसमें ECHS की जमीनी हकीकत सामने रखी गई है।
🔹 ECHS क्यों संकट में है?
Memorandum के अनुसार ECHS को हर वर्ष औसतन 14,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है। इसके अलावा पिछले वर्षों का Carry Forward Liability (CFL) भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
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FY 2023-24 में CFL: लगभग ₹3,500 करोड़
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वर्तमान FY में CFL: लगभग ₹6,000 करोड़
इस प्रकार वर्ष 2025-26 के लिए कुल आवश्यकता लगभग ₹20,000 करोड़ हो चुकी है।
इसके विपरीत सरकार ने केवल ₹8,300 करोड़ का बजट आवंटित किया है।
🔹 अस्पतालों को भुगतान न मिलने की समस्या
फंड की इस भारी कमी का सबसे बड़ा असर पैनल्ड अस्पतालों पर पड़ा है।
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कई अस्पतालों को 6 से 8 महीने से भुगतान नहीं मिला
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अस्पताल ECHS मरीजों को कम प्राथमिकता देने लगे हैं
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कुछ अस्पतालों ने ECHS योजना से बाहर निकलना शुरू कर दिया है
🔹 पूर्व सैनिकों पर असर
इसका सीधा असर पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों पर पड़ रहा है।
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कैंसर
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हार्ट सर्जरी
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सुपर स्पेशियलिटी ट्रीटमेंट
जैसे इलाज अब ECHS के तहत मिलना मुश्किल हो रहा है।
गोवा और कई महानगरों के अस्पतालों ने चेतावनी दी है कि 31 दिसंबर 2025 के बाद वे ECHS मरीजों का इलाज नहीं करेंगे।
🔹 मुख्य मांगें क्या हैं?
Memorandum में केंद्र सरकार से मांग की गई है कि:
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30 जनवरी 2026 से पहले सभी लंबित बिलों का भुगतान किया जाए
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तुरंत ₹12,000 करोड़ अतिरिक्त जारी किए जाएं
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भविष्य में ECHS को पूरे वित्तीय वर्ष का फंड एक साथ दिया जाए
🔹 निष्कर्ष
ECHS केवल एक योजना नहीं, बल्कि देश के प्रति पूर्व सैनिकों के योगदान का सम्मान है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह योजना पूरी तरह असफल हो सकती है।
सरकार के लिए यह सिर्फ बजट का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी का सवाल है।




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